ईरानी राष्ट्रपति हसन रूहानी ने बुधवार को धमकी दी कि उनका देश, यूरेनियम के संवर्धन का स्तर बढ़ाने वाला है। दर अस्ल, ईरान की ओर से युरोपीय देशों को दी गयी मोहलत 7 जूलाई को खत्म हो रही है जिसके बाद ईरान यूरेनियम संवर्धन का स्तर बढ़ा सकता है। अमरीका परमाणु समझौते से निकल चुका है और उसके बाद उसने ईरान पर प्रतिबंध भी लगा दिये हैं लेकिन इन सब के बावजूद यह यह चाहता है कि ईरान, इस समझौते का पालन करे, इस से अधिक घृणित और क्या चीज़ हो सकती है? स्वंय तो निकल गया लेकिन ईरान से समझौते की प्रतिबद्धता की मांग की जा रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार परमाणु बम बनाने के लिए ईरान को कम संवर्धित यूरेनियम की 1050 किलोग्राम मात्रा चाहिए जबकि 90 प्रतिशत संवर्धित यूरेनियम की मात्र 25 किलो ही परमाणु बम बनाने के लिए पर्याप्त है।
सन 2015 में जब ईरान और विश्व की छे बड़ी शक्तियों के मध्य परमाणु समझौता हुआ तो ईरान के पास 10 हज़ार किलो संवर्धित यूरेनियम था जिनमें से 98 प्रतिशत यूरेनियम, समझौते के अनुसार देश से बाहर भेज दिया गया लेकिन ईरान के पास 90 हज़ार सेन्ट्रीफ्यूज मशीनें हैं जिनकी मदद से वह दोबारा इतना ही यूरेनियम संवर्धित कर सकता है और अमरीका की फारेन पालीसी पत्रिका के अनुसार ईरान कुछ ही हफ्तों के भीतर उच्च कोटि का संवर्धित यूरेनियम तैयार करने की क्षमता रखता है।
ईरान के पास एक वर्ष के भीतर ही परमाणु बम बनाने की तकनीक और क्षमता है लेकिन ईरान का कहना है कि वह वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनई के फतवा की वजह से परमाणु बम बनाने का प्रयास भी नहीं करेगा क्योंकि वरिष्ठ नेता ने इस्लामी शिक्षाओं के आधार पर, परमाणु बम सहित सभी सामूहिक हथियारों के उत्पादन को हराम और वर्जित कहा है लेकिन यह भी एक सच्चाई है कि ज़रूरी होने पर फतवा बदल भी जाता है।
दुनिया आज, ईरान और अमरीका के मध्य बढ़ते तनाव को देख रही है और निशचित रूप से अगले रविवार से इस तनाव में अधिक वृद्धि होगी क्योंकि यूरोपीय सरकारों, निर्धारित अवधि में ईरानी मांग को पूरा नहीं कर पायी हैं और हमें यह बिल्कुल नहीं लगता कि ईरानी अधिकारी, अपनी शर्तों से पीछे हटेंगे सिवाए यह कि कोई चमत्कार हो जाए या फिर अवधि में वृद्धि पर कोई समझौता कर लिया जाए और हमें यह भी विश्वास है कि चमत्कार इतनी आसानी से नहीं हुआ करते।
ट्रम्प ने जो ईरान पर सीमिति हमले का फैसला दस मिनट पहले बदला था उसकी अस्ल वजह, ईरान की जवाबी कार्यवाही से इस्राईल का भय था और हमें इस्राईल का यह डर सही भी लगता है क्योंकि ईरान के सांसद सैयद मुजतबा ज़ुन्नूरी ने कहा है कि अगर अमरीका ने ईरान पर हमला किया तो उसके आधे घंटे के भीतर इस्राईल तबाह हो जाएगा। हमें लगता है कि इस्राईल अब भी डरा हुआ है यही नहीं बल्कि हमें विश्वास है कि उसका डर कई गुना बढ़ गया है।
ईरान के क्रांति संरक्षक बल, आईआरजीसी के प्रमुख जनरल हुसैन सलामी ने बुधवार को कहा कि ईरान की सैन्य शक्ति की वजह से ट्रम्प को ईरान के खिलाफ अपनी योजना से पीछे हटना पड़ा और यह कि दुश्मन, युद्ध से डरा हुआ है, ईरान की एयर डिफेन्स यूनिट के कमांडर अमीर सबाही ने यह कह हर ईरान के दुश्मनों का डर और भी बढ़ा दिया कि अगर युद्ध हुआ तो ईरान अपने खुफिया हथियार से सब को चौंका देगा।
फ्रांस की प्रसिद्ध पत्रिका लीमोंड डिप्लोमेटिक ने लिखा है कि ईरान के खिलाफ अमरीका को सैन्य कार्यवाही से 15 चीज़ें रोक रही हैं जिनमें से सब से बड़ी रुकावट, मध्य पूर्व में बड़ी संख्या में अमरीकी सैनिकों के मारे जाने की आशंका है और दूसरे यह कि ईरान की रक्षा शक्ति काफी मज़बूत है।
चुनावी अभियान में सभी अमरीकी सैनिकों को मध्य पूर्व से वापस बुलाने का वादा करने वाले अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प में इतना साहस ही नहीं है कि वह ईरान के खिलाफ कोई युद्ध छेड़ कर इस्राईल और क्षेत्र में अपने अन्य घटकों की जान मुसीबत में डाल दें इसका उन्हें आगामी चुनाव में भी भारी नुक़सान हो सकता है।
ईरान के खिलाफ अमरीकी हमले की राह में लीमोंड पत्रिका ने जिन बाधाओं का उल्लेख किया है हम उससे सहमत हैं लेकिन हमारी नज़र एक और वजह यह भी है कि मध्य पूर्व में अमरीका के सब से बड़े घटक और युद्धोन्मादी इस्राईल को सन 1967 में अरबों को पराजित करने के बाद से अब तक किसी भी युद्ध में सफलता नहीं मिली है हालांकि उसे इन सभी युद्धों में असीमित अमरीकी समर्थन प्राप्त रहा है इस लिए अगर अब भी कोई युद्ध होता है तो उसका भी परिणाम, अलग नहीं होगा। हमें तो बिल्कुल ही नहीं लगता कि इस्राईल इस प्रकार के किसी युद्ध के बाद अपनी वर्तमान छवि भी बचा पाएगा, आप सब देख लीजिएगा। ( रायुलयौम, अब्दुलबारी अतवान, लेखक के विचारों से पार्स टूडे का सहमत होना ज़रूरी नहीं। )